जन्म से ही सारी शुभता, दिव्यता, पवित्रता हमारे पास है। हम ईश्वर के अंश हैं। जो कुछ ईश्वर के पास है, वह सब हमारे पास भी है। जैसे बीज में पेड़ बनने की सामर्थ्य है, वैसे ही हम में भी विराटता छिपी हुई है और वो मंत्र से, शब्दों से उजागर होती है। इसलिए मंत्र का आराधन करना कभी न भूलें। अपने इष्टदेव, कुल देवता, ग्राम देवता की जो साधना, उपासना, मंत्र है, उनका हमेशा स्मरण करते रहें। आज जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी गिरि के जीवन सूत्र में जानिए हमारे लक्ष्य कैसे पूरे हो सकते हैं? आज का जीवन सूत्र जानने के लिए ऊपर फोटो पर क्लिक करें।
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