गाडरवारा सिविल अस्पताल में खून की कमी से पीड़ित 11 वर्षीय अमृता ठाकुर को नरसिंहपुर जिला अस्पताल रेफर किया गया लेकिन तीन घंटे तक 108 एम्बुलेंस सेवा नहीं पहुंची। अस्पताल में एम्बुलेंस खड़ी थी, लेकिन उसकी बैटरी निकालकर अलग रखी गई थी। बच्ची के परिजन एम्बुलेंस के लिए गुहार लगाते रहे और मासूम अस्पताल के बिस्तर पर दर्द से कराहती रही। मासूम की मां की गुहार: “सिस्टम नहीं सुनता, तो हम क्या करें?” अमृता की मां, मोहपानी निवासी पंचू ठाकुर की पत्नी, ने बताया कि सुबह 11 बजे से दोपहर 3.30 बजे तक सिर्फ एम्बुलेंस का इंतजार करते रहे। कोई सुनवाई नहीं हुई। अंत में हमें निजी वाहन की मदद से जिला अस्पताल जाना पड़ा। वहां रात 11 बजे जाकर बच्ची को ब्लड चढ़ाया गया। अब कुछ सुधार है, लेकिन ये क्या व्यवस्था है? डॉक्टर नदारद, फोन रिसीव नहीं किया अस्पताल प्रभारी डॉ. उपेन्द्र वस्त्रागार मौके पर मौजूद नहीं थे। हमने कई बार-बार कॉल किए, लेकिन उन्होंने कोई रिस्पांस नहीं दिया। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने खुद को एम्बुलेंस व्यवस्था से अलग बताकर जवाबदेही से किनारा कर लिया। स्थानीय लोगों ने की हस्तक्षेप, फिर जाकर चालू हुई एम्बुलेंस सामाजिक कार्यकर्ता पवन पटेल ने आरोप लगाया कि शासकीय एम्बुलेंस जानबूझकर खराब बताई जा रही थी। हस्तक्षेप के बाद बैटरी दोबारा लगाई गई, तब जाकर वाहन चालू हुआ और बच्ची को अस्पताल भेजा गया। पवन पटेल ने कहा कि शनिवार को वे स्वास्थ्य विभाग और मंत्री को लिखित शिकायत सौंपेंगे।

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