मुरैना जिले के जौरा क्षेत्र में शनिवार को तेज बारिश के चलते बुरावली और काशीपुर गांव के बीच स्थित एक अस्थायी डेम टूट गया। इससे आसपास के खेतों में पानी भर गया और करीब 20 बीघा में खड़ी सोयाबीन और तिल की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। पानी का बहाव इतना तेज था कि कुछ ही समय में खड़ी फसलें नष्ट हो गईं। प्रभावित किसान मुआवजे की मांग कर रहे हैं। इन किसानों को नुकसान हुआ
प्रभावित किसानों में आदिराम जाटव, माखन कुशवाहा, मलखान कुशवाहा सहित कई अन्य शामिल हैं, जिनकी पूरी फसल इस आपदा में तबाह हो गई। किसानों ने बताया कि वे पहले ही बीज, खाद और मजदूरी में कर्ज ले चुके थे, अब फसल बर्बाद होने से उनका संकट और गहरा गया है। ग्रामीणों ने विभाग पर लगाए लापरवाही के आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि डेम की स्थिति पहले से जर्जर थी, लेकिन संबंधित विभाग ने समय पर मरम्मत नहीं कराई। यदि समय रहते डेम की मरम्मत कर दी जाती, तो हमारी फसलें बच सकती थीं। किसानों ने प्रशासन से तुरंत सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि प्राकृतिक आपदा के चलते उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ा है और सरकार को उनकी मदद करनी चाहिए। जिले में अब तक 502.7 बारिश
मुरैना जिले में 1 जून से 18 जुलाई तक 502.7 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई है, जो गत वर्ष की तुलना में 245.4 मिलीमीटर वर्षा अधिक है। पिछले वर्ष इसी अवधि में 257.3 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज हुई थी, जबकि जिले की औसत वर्षा 706.9 मिलीमीटर है। अधीक्षक भू-अभिलेख मुरैना ने बताया कि जिले में 1 जून से 18 जुलाई तक सर्वाधिक वर्षा मुरैना में 615 मिलीमीटर दर्ज की गई है। सबलगढ़ में 607, पोरसा में 597, जौरा में 461, कैलारस में 369 और अंबाह तहसील में सबसे कम 367 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। इधर, 24 घंटे में सबसे ज्यादा 42 मिलीमीटर वर्षा मुरैना में दर्ज की गई है। कैलारस में 32, जौरा में 18, पोरसा में 11, अम्बाह में 10 और सबलगढ़ में 4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है।

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