राजधानी रायपुर में पिछले पांच साल से भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद का कारण बने स्काई वॉक पर सीएजी ने अपनी रिपोर्ट जारी कर दी है। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि स्काई वॉक परियोजना बिना किसी उपयोगिता के अधूरी रह गई, जिससे 36.82 करोड़ का व्यय हुआ व्यर्थ हो गया। बता दें कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मॉनसून सत्र के अंतिम दिन की सीएजी की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी। इधर, राज्य शासन ने स्काई वॉक को फिर से बनाने की पहल की है। इसके लिए 37 करोड़ रुपए के टेंडर जारी भी कर दिए गए हैं। सीएजी रिपोर्ट में कहा गया है कि स्काई वॉक के निर्माण की परियोजना को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जल्दबाजी में शुरू किया गया था। परियोजना के लिए प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति प्राप्त किए बिना निर्माण के लिए टेंडर बुलाया गया था। कंसल्टेंट द्वारा टेंडर के पहले चरण का काम पूरे किए बिना ही कार्यादेश जारी कर दिया गया था। इससे काम पूरा होने में बाधा उत्पन्न हुई। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा स्काई वॉक के ड्राइंग डिजाइन में किए गए संशोधन में परियोजना की लागत बढ़ा दी। इससे इसके पूरा होने में और देरी हुई। जिसके कारण यह योजना अधूरी रह गई। आठ साल से विवाद में स्काई वॉक: रायपुर में स्काई-वॉक का निर्माण फिर से शुरू होगा। अधूरे पड़े इस बहुचर्चित और विवादित प्रोजेक्ट के लिए पीडब्लूडी ने राशि मंजूर कर दी है। करीब 8 साल से अधूरे खड़े ढांचे को पूरा करने के लिए टेंडर हो चुका है। इसके लिए 37 करोड़ 75 लाख रुपए की मंजूरी भी मिल गई है। करीब डेढ़ किमी के स्काई वॉक में 12 जगह उतरने और चढ़ने के लिए ऐस्कलेटर लगेंगे। इसी के पास सीढ़ियां भी बनाई जाएंगी। इसके अलावा दो जगहों में अलग से सीढ़ियां बनेंगी। लोक निर्माण विभाग ने पीएसएस कंस्ट्रक्शन रायपुर को यह काम सौंपा है। यह प्रोजेक्ट पहले की कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अधूरा रह गया था।
दस साल बाद भी अरपा भैंसाझार परियोजना अधूरी सीएजी ने अरपा भैंसाझार परियोजना को लेकर भी टिप्पणी की है। इसके मुताबिक परियोजना में वन पर्यावरण मंजूरी और अंतरराज्यीय मंजूरी तथा केंद्रीय जल आयोग से डीपीआर की मंजूरी के बगैर ही इसका काम शुरू कर दिया गया था, जिसके कारण काम के दायरे और परियोजना के लागत में बदलाव हुआ। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में देरी के कारण काम शुरू होने में दस साल से अधिक समय बीत गया है। फिर भी परियोजना अधूरी है।

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