भारत में आईफोन बनाने वाली कंपनी फॉक्सकॉन से 300 से ज्यादा चीनी इंजीनियर्स और टेक्नीशियंस को अचानक वापस बुलाने पर भारत सरकार ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। सरकार ने कहा है कि स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है। एपल के पास उत्पादन को प्रभावित किए बिना काम चलाने के लिए पर्याप्त इंजीनियर्स मौजूद है। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक एक सरकारी अधिकारी ने कहा एपल के पास विकल्प हैं और वे इस चुनौती का सामना कर सकते हैं। यह मामला मुख्य रूप से एपल और फॉक्सकॉन के बीच है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब एपल भारत में आईफोन 17 बनाने की तैयारी कर रहा है। इसका ट्रायल प्रोडक्शन जुलाई में शुरू होने की संभावना है। अगस्त में मास प्रोडक्शन किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक चीन ने भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को प्रभावित करने के लिए इंजीनियर्स और टेक्नीशियन्स को वापस बुलाने के निर्देश दिए हैं। भारत में हाई-टेक असेंबली लाइन संभालते हैं चीनी इंजीनियर चीनी इंजीनियर फॉक्सकॉन की हाई-टेक असेंबली लाइन, फैक्ट्री डिजाइन और भारतीय कर्मचारियों को प्रशिक्षण देने का काम कर रहे थे। इसके लिए भारत सरकार ने चीनी इंजीनियरों के लिए वीजा सुविधा भी प्रदान की थी, ताकि उत्पादन में कोई बाधा न आए। चीनी वर्कर्स के जाने से फैक्ट्रियों में काम धीमा हो सकता है सूत्रों ने कहा, “चाइनीज कर्मचारियों की संख्या 1% से भी कम है, लेकिन ये प्रोडक्शन और क्वालिटी मैनेजमेंट जैसे अहम ऑपरेशंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। चीनी सरकार द्वारा अपने नागरिकों को वापस बुलाने के निर्देश से फैक्ट्रियों में काम धीमा हो सकता है। आईफोन मैन्यूफैक्चरिंग पर अभी चीन का दबदबा आईफोन मैन्यूफैक्चरिंग पर अभी चीन का दबदबा है। 2024 में कंपनी के ग्लोबल आईफोन शिपमेंट में इसका हिस्सा लगभग 28% था। चार साल पहले भारत ने आईफोन असेंबलिंग शुरू की थी भारत ने 4 साल पहले बड़े पैमाने पर आईफोन असेंबल करना शुरू किया था, और अब ये ग्लोबल प्रोडक्शन का पांचवां हिस्सा बनाता है। एपल की योजना 2026 के अंत तक अमेरिका के लिए ज्यादातर आईफोन्स भारत में बनाने की है, जिसकी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने आलोचना की है। एपल का भारत पर इतना ज्यादा फोकस क्यों?
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